मनी रिस्टोरेशन पोर्टल: साइबर फ्रॉड में फ़्रीज़ हुआ पैसा वापस कैसे पाएँ

अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026 · मनी रिस्टोरेशन पोर्टल के सार्वजनिक पेज (How to Apply, FAQ, Contacts) 31 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए; गृह मंत्रालय के जुलाई और अगस्त 2026 के बयानों पर आधारित

सीधा जवाब: अगर आपने cybercrime.gov.in पर या 1930 हेल्पलाइन पर साइबर फ्रॉड की शिकायत की थी और किसी बैंक ने वह पैसा होल्ड कर लिया, तो आप गृह मंत्रालय के मनी रिस्टोरेशन पोर्टल mrm-ncrp.mha.gov.in पर उसे वापस माँग सकते हैं। इसके लिए शिकायत का 14 अंकों का एक्नॉलेजमेंट नंबर, PAN कार्ड की कॉपी और अपने नाम का बैंक खाता चाहिए। पुलिस रिक्वेस्ट की जाँच करती है, और पुलिस के आदेश के 15 कैलेंडर दिन के अंदर बैंक पैसा जारी करता है। किसी एक बैंक में ₹50,000 से ज़्यादा होल्ड है, तो पहले FIR ज़रूरी है।

इस गाइड में (किसी हिस्से पर जाने के लिए टैप करें)
  1. यह पोर्टल क्या है, और क्या नहीं
  2. शुरू करने से पहले ये तैयार रखें
  3. स्टेप-बाय-स्टेप: पैसा वापस पाने के लिए आवेदन
  4. ₹50,000 का नियम: FIR कब ज़रूरी है
  5. पूरा पैसा वापस क्यों नहीं मिलता
  6. बैंक या पुलिस कार्रवाई न करे तो
  7. गलतियाँ जिनसे रिफ़ंड अटकता है
  8. धोखाधड़ी से सावधान रहें
  9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  10. आधिकारिक लिंक
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यह पोर्टल क्या है, और क्या नहीं

जब आप किसी फ़ाइनेंशियल फ्रॉड की शिकायत करते हैं, तो बैंक पैसे को आगे जाने से रोकने की कोशिश करते हैं और जिन खातों में पैसा पहुँचा है, उन पर “लियन” (होल्ड) लगा देते हैं। 2026 से पहले यह होल्ड किया हुआ पैसा वापस पाने के लिए अक्सर थाने और बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे, और कई बार कोर्ट का आदेश भी लेना पड़ता था। अब गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) इसके लिए मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल चलाता है। गृह मंत्रालय ने जुलाई 2026 में बताया कि यह अप्रैल 2026 से काम कर रहा है। साथ में एक अलग ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल भी है, उन लोगों के लिए जिनके खाते फ़्रीज़ हो गए।

यह पोर्टल सिर्फ़ उस पैसे के लिए है जो साइबर फ्रॉड की शिकायत के बाद होल्ड हुआ। इससे भूले हुए बैंक खाते, PF या बीमा का पैसा नहीं खोजा जाता। उसके लिए हमारी अनक्लेम्ड एसेट्स पोर्टल गाइड या “मेरा पैसा कहाँ हो सकता है?” फ़ाइंडर देखें।

अभी तक फ्रॉड की शिकायत नहीं की? सबसे पहले वही करें, जितनी जल्दी हो सके: 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। पोर्टल सिर्फ़ वही पैसा लौटा सकता है जिसे बैंक होल्ड कर पाए।

शुरू करने से पहले ये तैयार रखें

  • शिकायत दर्ज करते समय मिला 14 अंकों का NCRP एक्नॉलेजमेंट नंबर
  • शिकायत में दिया गया मोबाइल नंबर, OTP के लिए
  • PAN कार्ड की कॉपी
  • अपने नाम के चालू बैंक खाते का ब्योरा, जिसमें पैसा आना है
  • FIR की कॉपी, अगर किसी एक बैंक में ₹50,000 से ज़्यादा होल्ड है (नीचे देखें)
  • कोर्ट का आदेश, अगर पहले से है: पोर्टल पर इसे अपलोड करने के लिए “Select Court Order” विकल्प है

स्टेप-बाय-स्टेप: पैसा वापस पाने के लिए आवेदन

  1. SMS का इंतज़ार करें। पैसा होल्ड होने के बाद बैंक देखता है कि उसमें से असल में कितना लौटाया जा सकता है। फिर आपको पोर्टल के लिंक के साथ SMS और ईमेल आता है। पोर्टल के FAQ के मुताबिक़ SMS में लिखी तारीख के बाद ही आवेदन करें।
  2. Raise Refund Request। mrm-ncrp.mha.gov.in पर “Raise Refund Request” खोलें, 14 अंकों का एक्नॉलेजमेंट नंबर डालें और OTP वेरिफ़ाई करें।
  3. रिफ़ंड खाता जाँचें। “Refund Account Details” में वह खाता दिखता है जिसमें पैसा आएगा। ज़रूरत हो तो इसे सही करें। कोर्ट का आदेश हो तो यहीं अपलोड करें।
  4. PAN कार्ड की कॉपी लगाएँ और इंडेम्निटी अंडरटेकिंग दें: यानी यह वादा कि ज़रूरत पड़ने पर आप यह रकम कोर्ट के सामने पेश करेंगे और कोर्ट के आदेश मानेंगे। केस चलने तक पैसा आपको अंतरिम कस्टडी के तौर पर दिया जाता है।
  5. कैप्चा भरकर सबमिट करें। SMS और ईमेल पर “MR” से शुरू होने वाली 14 कैरेक्टर की रिक्वेस्ट ID आती है। इसे लिखकर रखें।
  6. पुलिस वेरिफ़िकेशन। रिक्वेस्ट अपने-आप उस थाने में जाती है जहाँ आपकी शिकायत है। जाँच अधिकारी देखते हैं कि होल्ड किया गया पैसा आपका ही है।
  7. पैसा जारी होना। BNSS की धारा 106(3) के तहत अधिकारी के आदेश के बाद बैंक को 15 कैलेंडर दिन में पैसा आपके खाते में भेजना होता है। स्थिति देखने के लिए पोर्टल पर “Track Your Complaint” इस्तेमाल करें।

₹50,000 का नियम: FIR कब ज़रूरी है

पोर्टल के FAQ में एक नियम है जिस पर कई लोग अटक जाते हैं। अगर किसी एक बैंक में होल्ड रकम ₹50,000 से कम है, तो SOP की शर्तों के तहत पुलिस बिना FIR के पैसा जारी करने का निर्देश दे सकती है। अगर किसी बैंक खाते में होल्ड रकम ₹50,000 से ज़्यादा है, तो पैसा लौटाने से पहले FIR ज़रूरी है। यह सीमा हर बैंक पर अलग से लागू होती है, आपके कुल नुकसान पर नहीं।

एक उदाहरण: मीना ने एक नकली शेयर-ट्रेडिंग ऐप में ₹1,20,000 गँवाए और उसी शाम 1930 पर कॉल किया। पैसा दो बैंकों तक पहुँचा: बैंक A के एक खाते में ₹35,000 और बैंक B में ₹60,000 होल्ड हुए। ₹35,000 पुलिस अधिकारी के निर्देश पर बिना FIR के जारी हो सकते हैं। बैंक B के ₹60,000 के लिए पहले FIR चाहिए, इसलिए मीना साइबर थाने में FIR दर्ज कराती है और उसकी कॉपी रखती है। बाकी ₹25,000 होल्ड से पहले ही खातों से निकल चुके थे, इसलिए पोर्टल उन्हें नहीं लौटा सकता।

पूरा पैसा वापस क्यों नहीं मिलता

  • सिर्फ़ होल्ड हुआ पैसा लौटता है। होल्ड से पहले ठग जो पैसा निकाल ले गए, वह इसमें नहीं आता।
  • “रिस्टोरेबल अमाउंट” होल्ड से कम हो सकता है। पोर्टल का FAQ यह उदाहरण देता है: ₹50,000 होल्ड हुए, लेकिन खाते में असल में ₹40,000 ही बचे हैं जिन्हें आपसे जोड़ा जा सकता है, तो रिस्टोरेबल अमाउंट ₹40,000 है।
  • एक खाता, कई पीड़ित। म्यूल खातों में अक्सर कई लोगों का पैसा होता है। अधिकारी मनी ट्रेल और समय देखते हैं। जहाँ पैसा हर पीड़ित के हिसाब से अलग नहीं किया जा सकता, वहाँ हर क्लेम के अनुपात में बाँटा जाता है।

बैंक या पुलिस कार्रवाई न करे तो

  • अगर बैंक आदेश का पालन नहीं कर पाता या अधिकारी से असहमत है, तो उसे पोर्टल पर कारण दर्ज करने होते हैं, और मामला निर्देशों के लिए स्थानीय कोर्ट में जा सकता है।
  • आप खुद भी कोर्ट जा सकते हैं। पोर्टल इसके लिए BNSS की धारा 497, 498 और 503 बताता है। पात्र होने पर ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से मुफ़्त कानूनी सलाह मिल सकती है।
  • पोर्टल के Contacts टैब पर हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के साइबर क्राइम नोडल अधिकारी और ग्रीवेंस अधिकारी की सूची है। अपना एक्नॉलेजमेंट नंबर और रिक्वेस्ट ID लिखकर उन्हें ईमेल करें।

गलतियाँ जिनसे रिफ़ंड अटकता है

  • SMS में लिखी तारीख से पहले आवेदन करना। जब तक बैंक रिस्टोरेबल अमाउंट तय नहीं करता, जारी करने के लिए कुछ नहीं होता।
  • ऐसा खाता देना जो आपका नहीं है, या जो बंद या फ़्रीज़ है। अपने नाम का चालू खाता ही दें।
  • FIR दर्ज न कराना, जब किसी एक बैंक में ₹50,000 से ज़्यादा होल्ड है। FIR होने तक रिक्वेस्ट रुकी रहेगी।
  • मोबाइल नंबर बदल देना। OTP उसी नंबर पर आता है जो शिकायत में दिया था।
  • एक्नॉलेजमेंट नंबर खो देना। शिकायत वाले दिन का SMS या ईमेल सँभालकर रखें, और रिक्वेस्ट ID का स्क्रीनशॉट ले लें।

धोखाधड़ी से सावधान रहें

फ्रॉड के शिकार लोगों को दूसरी बार निशाना बनाया जाता है। कुछ लोग “साइबर सेल”, “RBI” या “रिफ़ंड विभाग” के नाम से फ़ोन करके फ़ीस लेकर होल्ड पैसा छुड़वाने की बात करते हैं, या OTP या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप माँगते हैं। आधिकारिक पोर्टल पर कहीं पैसे देने को नहीं कहा जाता। आवेदन सिर्फ़ mrm-ncrp.mha.gov.in पर करें, और देख लें कि पता .gov.in पर ख़त्म होता है। पैसा “छुड़वाने” के लिए किसी को भुगतान न करें, और OTP कभी न बताएँ। ऐसी नई कोशिश की शिकायत cybercrime.gov.in पर करें या 1930 पर कॉल करें।

आगे क्या करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आवेदन के लिए पैसे देने पड़ते हैं?

आधिकारिक पोर्टल पर कहीं फ़ीस नहीं माँगी जाती। आवेदन आप खुद ऑनलाइन करते हैं। जो रिफ़ंड “छुड़वाने” के लिए पैसे माँगे, उससे सावधान रहें।

कितना समय लगता है?

जाँच अधिकारी के आदेश के बाद बैंक के पास 15 कैलेंडर दिन होते हैं। उससे पहले पुलिस वेरिफ़िकेशन के लिए पोर्टल पर कोई तय समय नहीं लिखा है, इसलिए मामला अटके तो थाने से फ़ॉलो-अप करें।

पैसा महीनों पहले गया था। क्या अब भी आवेदन कर सकते हैं?

हाँ, अगर आपकी शिकायत दर्ज है और कुछ पैसा होल्ड हुआ था। होल्ड रकम की पुष्टि वाले SMS का इंतज़ार करें, फिर आवेदन करें।

क्या बाद में पैसा लौटाना पड़ सकता है?

पैसा आपको अंतरिम कस्टडी के तौर पर मिलता है। आप लिखकर देते हैं कि ज़रूरत पड़ने पर रकम कोर्ट के सामने पेश करेंगे और कोर्ट के आगे के आदेश मानेंगे।

अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026। नियम और पोर्टल बदलते रहते हैं। अगर यहाँ लिखी कोई बात आपको बताई गई बात से मेल नहीं खाती, तो कृपया हमें बताएँ।

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इस गाइड के बारे में: यह गाइड Unclaimed Now संपादकीय टीम ने मनी रिस्टोरेशन पोर्टल की प्रकाशित प्रक्रिया और FAQ, और गृह मंत्रालय के 21 जुलाई और 11 अगस्त 2026 के बयानों (PIB) के आधार पर लिखी है। Unclaimed Now एक स्वतंत्र गाइड है, सरकारी वेबसाइट नहीं। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। हम अपनी गाइड कैसे लिखते हैं।