मृत माता-पिता के बैंक खाते का पैसा कैसे क्लेम करें (नॉमिनी के साथ या बिना)

अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026 · RBI के Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks Directions, 2025 पर आधारित

संक्षेप में: अगर माता या पिता का निधन हो गया है, तो नॉमिनी या कानूनी वारिस ब्रांच में बैंक का क्लेम फ़ॉर्म, मृत्यु प्रमाणपत्र और KYC दस्तावेज़ (पहचान और पते का प्रमाण) जमा करके उनके बैंक खातों का पैसा क्लेम कर सकते हैं। RBI के 2025 के नियमों के तहत बैंकों को सभी दस्तावेज़ मिलने के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर क्लेम निपटाना होता है, और देरी होने पर मुआवज़ा देना होता है।

इस गाइड में (किसी हिस्से पर जाने के लिए टैप करें)
  1. यह गाइड किसके लिए है
  2. पहले पता करें कि आपकी स्थिति कौन-सी है
  3. शुरू करने से पहले: ये दस्तावेज़ तैयार रखें
  4. स्टेप-बाय-स्टेप: क्लेम कैसे करें
  5. अगर बैंक देरी करे या मना कर दे
  6. आम समस्याएँ और उनका हल
  7. धोखाधड़ी से सावधान रहें
  8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  9. आधिकारिक लिंक
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यह गाइड किसके लिए है

  • नॉमिनी जिनका नाम किसी दिवंगत व्यक्ति के खाते या फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में दर्ज है
  • संयुक्त खाताधारक जिनके साथी खाताधारक का निधन हो गया है
  • कानूनी वारिस (बच्चे, पति/पत्नी, माता-पिता) जहाँ कोई नॉमिनी दर्ज नहीं था

पहले पता करें कि आपकी स्थिति कौन-सी है

क्लेम कैसे होगा, यह इस पर निर्भर करता है कि खाता कैसे खोला गया था। पासबुक या FD रसीद देखें, या ब्रांच में पूछें।

1. नॉमिनी दर्ज है

यह सबसे आसान स्थिति है। मृत्यु प्रमाणपत्र, नॉमिनी का KYC और क्लेम फ़ॉर्म मिलने के बाद बैंक नॉमिनी को भुगतान कर देता है। सक्सेशन सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं होती।

2. संयुक्त खाता है, “either or survivor” या “former or survivor” के साथ

जीवित खाताधारक मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करके खाता जारी रख सकता है या बैलेंस ले सकता है।

3. न नॉमिनी है, न सर्वाइवर वाली शर्त

कानूनी वारिस क्लेम करते हैं। RBI के अनुसार बैंकों को कमर्शियल बैंकों में कम से कम ₹15 लाख और को-ऑपरेटिव बैंकों में ₹5 लाख तक के क्लेम के लिए सरल प्रक्रिया अपनानी होती है। इस सीमा से ऊपर बैंक सक्सेशन सर्टिफ़िकेट, प्रोबेट (वसीयत पर कोर्ट की मंज़ूरी) या ऐसे ही कानूनी दस्तावेज़ माँग सकते हैं।

शुरू करने से पहले: ये दस्तावेज़ तैयार रखें

  • खाताधारक का मृत्यु प्रमाणपत्र (जाँच के लिए मूल, और कॉपियाँ)
  • क्लेम करने वाले का KYC: PAN, आधार या पहचान और पते का कोई दूसरा प्रमाण, और फ़ोटो
  • पासबुक, चेकबुक, FD रसीदें या खाते की जो भी जानकारी आपके पास हो
  • बैंक का क्लेम फ़ॉर्म (बैंकों को ब्रांच और वेबसाइट पर मानक फ़ॉर्म रखने होते हैं)
  • रिश्ते का प्रमाण, अगर आप कानूनी वारिस हैं
  • नॉमिनी न होने पर कानूनी वारिसों के लिए: बैंक आपके मामले के लिए जो दस्तावेज़ बताए, जैसे एफ़िडेविट (शपथ-पत्र, आमतौर पर स्टाम्प पेपर पर), इंडेम्निटी (लिखित वादा कि कोई दूसरा दावेदार आया तो आप बैंक को पैसा लौटाएँगे), बाकी वारिसों का अनापत्ति पत्र, कानूनी वारिस प्रमाणपत्र, या सीमा से ऊपर की राशि के लिए सक्सेशन सर्टिफ़िकेट या प्रोबेट

पता नहीं कि माता-पिता के खाते किन बैंकों में थे? पहले RBI के UDGAM पोर्टल पर उनका नाम खोजें। हमारी UDGAM गाइड में तरीका बताया गया है।

स्टेप-बाय-स्टेप: क्लेम कैसे करें

  1. जिस ब्रांच में खाता है, वहाँ बैंक को मृत्यु की सूचना दें, या अगर बैंक में ऑनलाइन क्लेम की सुविधा है तो उसका इस्तेमाल करें।
  2. क्लेम फ़ॉर्म और चेकलिस्ट लें। अपनी स्थिति (नॉमिनी, सर्वाइवर या कानूनी वारिस) के हिसाब से दस्तावेज़ों की सूची माँगें।
  3. फ़ॉर्म भरें और उसके साथ मृत्यु प्रमाणपत्र, अपना KYC और बाकी दस्तावेज़ लगाएँ।
  4. जमा करें और तारीख वाली पावती लें। 15 दिन की अवधि उस तारीख से शुरू होती है जब बैंक के पास सभी ज़रूरी दस्तावेज़ हों।
  5. क्लेम ट्रैक करें। बैंकों से क्लेम ट्रैकिंग की सुविधा देने की अपेक्षा है। अगर कुछ कमी है, तो बैंक को बताना चाहिए कि क्या और क्यों।
  6. पैसा प्राप्त करें अपने खाते में, या बैंक खाता बंद करके क्लेम के अनुसार भुगतान करता है।

अगर बैंक देरी करे या मना कर दे

  • अगर बैंक अपनी गलती से 15 दिन से ज़्यादा देरी करता है, तो RBI के नियमों के तहत उसे देरी की अवधि के लिए क्लेम राशि पर बैंक रेट + 4% सालाना की दर से ब्याज के रूप में मुआवज़ा देना होता है। लॉकर के मामले में मुआवज़ा हर दिन की देरी के लिए ₹5,000 है।
  • पहले बैंक के शिकायत अधिकारी को लिखित शिकायत करें।
  • अगर 30 दिन में जवाब न आए या आप संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर RBI में मुफ़्त शिकायत करें।

आम समस्याएँ और उनका हल

मृत्यु प्रमाणपत्र का नाम बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता

दोनों नामों को जोड़ने वाले दस्तावेज़ साथ रखें, जैसे दिवंगत व्यक्ति का आधार या PAN, पुरानी पासबुक, या अंतर समझाने वाला एफ़िडेविट।

कई वारिस हैं, पर क्लेम एक ही कर रहा है

बैंक आमतौर पर बाकी वारिसों से अनापत्ति पत्र या एफ़िडेविट माँगता है, और इंडेम्निटी भी माँग सकता है।

खाता बहुत पुराना है और पैसा RBI के पास चला गया

10 साल तक बिना लेन-देन वाली जमा RBI के DEA फ़ंड में चली जाती है, लेकिन उसे उसी बैंक से, जहाँ लागू हो वहाँ ब्याज के साथ, अब भी क्लेम किया जा सकता है। प्रक्रिया वही रहती है।

धोखाधड़ी से सावधान रहें

बैंक, EPFO या दूसरे आधिकारिक माध्यमों से क्लेम करना मुफ़्त है। ऐसे किसी “एजेंट” को कभी पैसे न दें जो खुद फ़ोन या मैसेज करके पैसा वापस दिलाने की पेशकश करे। OTP, पासवर्ड या खाते की पूरी जानकारी कभी शेयर न करें। अगर कोई आपको निशाना बनाए, तो cybercrime.gov.in पर शिकायत करें या 1930 पर कॉल करें।

आगे क्या करें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सक्सेशन सर्टिफ़िकेट हमेशा ज़रूरी है?

नहीं। नॉमिनी या सर्वाइवर होने पर इसकी ज़रूरत नहीं होती। नॉमिनी न होने पर बैंक सीमा तक (कमर्शियल बैंकों में कम से कम ₹15 लाख, को-ऑपरेटिव बैंकों में ₹5 लाख) सरल प्रक्रिया अपनाते हैं। उससे ऊपर या विवाद होने पर सक्सेशन सर्टिफ़िकेट या प्रोबेट माँगा जा सकता है।

बैंक कितना समय लेता है?

RBI के अनुसार बैंकों को सभी ज़रूरी दस्तावेज़ मिलने के 15 कैलेंडर दिनों में क्लेम निपटाना होता है।

क्या पैसा नॉमिनी का हो जाता है?

नॉमिनी को बैंक से पैसा मिलता है, जिससे बैंक की ज़िम्मेदारी पूरी हो जाती है। लेकिन आखिर में पैसे का मालिक कौन है, यह वसीयत या उत्तराधिकार कानून से तय होता है, इसलिए नॉमिनी को कानूनी वारिसों के साथ पैसा बाँटना पड़ सकता है।

क्या मैं दूसरे शहर से क्लेम कर सकता हूँ?

कई बैंक किसी भी ब्रांच में या ऑनलाइन क्लेम स्वीकार करते हैं। बैंक से पूछें; क्लेम पर कार्रवाई फिर भी वही ब्रांच करती है जहाँ खाता है।

अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026। अगर यहाँ लिखी कोई बात आपके बैंक की प्रक्रिया से मेल न खाए, तो कृपया हमें बताएँ।

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इस गाइड के बारे में: यह गाइड Unclaimed Now संपादकीय टीम ने RBI के Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks Directions, 2025 के आधार पर लिखी है। Unclaimed Now एक स्वतंत्र गाइड है, सरकारी वेबसाइट नहीं। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। हम अपनी गाइड कैसे लिखते हैं।